नवरात्रि में घर पर करें मां दुर्गा की आसान पूजा: संपूर्ण विधि, सामग्री और मंत्र
नवरात्रि पूजा के लिए आवश्यक सामग्री (Samagri)
पूजा शुरू करने से पहले सारी सामग्री एकत्रित कर लेना शुभ माना जाता है। आपको निम्नलिखित चीजों की आवश्यकता होगी :
नवरात्रि पूजा विधि (Navratri Puja Vidhi)
नवरात्रि पूजा मुख्यतः दो भागों में विभाजित है - पहले दिन कलश स्थापना और फिर नौ दिनों तक नियमित पूजा-अर्चना।
1. प्रथम दिवस: कलश स्थापना (Ghatasthapana / Kalash Sthapana)
नवरात्रि के पहले दाना प्रतिपदा के दिन कलश स्थापना का विधान है। इसे घटस्थापना भी कहते हैं। इसे शुभ मुहूर्त में ही करना चाहिए। सूर्योदय के बाद प्रातःकाल का समय सर्वोत्तम माना गया है .
चौकी की स्थापना: सबसे पहले पूजा स्थल को गंगाजल से पवित्र करें। वहां एक चौकी रखें और उस पर लाल कपड़ा बिछाएं .
जौ बोना (Sapta Dhanya): एक मिट्टी के पात्र में मिट्टी डालकर उसमें जौ के बीज बो दें। इसे चौकी के बीचों-बीच रखें। इसे ज्वारे कहते हैं, जो उन्नति और हरियाली का प्रतीक है .
कलश की स्थापना: अब कलश लें। उसके गले में कलावा (मौली) बांधें। कलश में गंगाजल मिला जल भरें। उसमें सुपारी, एक सिक्का, दूर्वा, अक्षत (चावल) और थोड़ा चंदन डालें . कलश के मुख पर आम के पांच पत्ते इस प्रकार रखें कि उनके सिरे पानी में डूबे रहें .
नारियल स्थापना: नारियल पर लाल कपड़ा लपेटकर कलावा बांधें और इसे कलश के ऊपर इस प्रकार रखें कि नारियल का मुख (जहां टहनी लगी हो) आपकी ओर रहे . अब इस कलश को जौ वाले पात्र के ऊपर या बगल में स्थापित करें .
आवाहन: कलश की स्थापना करने के बाद इसमें देवी-देवताओं का आवाहन किया जाता है। मंत्रोच्चार के साथ देवी से नौ दिनों तक यहां निवास करने की प्रार्थना करें .
2. प्रतिदिन की पूजा विधि (Daily Puja Vidhi)
कलश स्थापना के बाद अगले आठ दिनों तक प्रतिदिन इसी प्रकार पूजा करें :
प्रातःकाल स्नान आदि से निवृत्त होकर स्वच्छ वस्त्र धारण करें .
पूजा स्थल पर गंगाजल का छिड़काव करें।
सबसे पहले गणेश जी का ध्यान करें और उन्हें तिलक लगाएं, क्योंकि कोई भी शुभ कार्य गणेश पूजन के बिना संपूर्ण नहीं होता .
उसके बाद कलश, ज्वारे और मां दुर्गा की प्रतिमा का रोली, कुमकुम, चंदन, फूल, अक्षत आदि से पंचोपचार या षोडशोपचार पूजन करें .
अखंड ज्योति: यदि संभव हो, तो घी का एक दीपक (अखंड ज्योत) प्रज्वलित करें, जो पूरे नौ दिनों तक जलता रहे। ध्यान रखें कि जहां अखंड ज्योत जल रही हो, वहां कोई न कोई हमेशा मौजूद रहे .
मंत्र जाप और पाठ: "ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे" इस मूल मंत्र का जाप करें। साथ ही दुर्गा सप्तशती, दुर्गा चालीसा या देवी कवच का पाठ करना अत्यंत शुभ माना जाता है .
भोग और आरती: मां को भोग में फल, मिठाई या बताशे अर्पित करें। शाम के समय मां की आरती अवश्य करें .
3. अष्टमी या नवमी: कन्या पूजन (Kanya Pujan)
आठवें या नौवें दिन कन्या पूजन का विशेष महत्व है। इस दिन 2 से 10 वर्ष की 9 कन्याओं को (या 5, 7 कन्याओं को) भोजन के लिए आमंत्रित करें .
कन्याओं के पैर धोकर उन्हें आसन पर बिठाएं।
उनके माथे पर रोली-चावल का तिलक लगाएं और उनकी पूजा करें।
उन्हें मां का प्रसाद, भोजन (हलवा-पूरी-चना) और दक्षिणा दें। यह माना जाता है कि इन कन्याओं के रूप में स्वयं मां दुर्गा विराजमान होती हैं .
4. दशमी: विसर्जन विधि (Visarjan Vidhi)
दसवें दिन (दशहरा/विजयादशमी) को पूजा की समाप्ति होती है। इसे पारण या विसर्जन कहते हैं .
अंतिम दिन भी विधिवत पूजा करें।
क्षमा प्रार्थना करते हुए मां से आगामी वर्ष पुनः पधारने की विनती करें।
कलश से नारियल निकाल लें। कलश के जल को घर के सभी सदस्यों पर थोड़ा-थोड़ा छिड़कें और पिलाएं। इसे अमृत के समान पवित्र माना जाता है .
जौ के हरे-भरे पौधों (ज्वारे) को किसी नदी या पवित्र जल स्रोत में प्रवाहित कर दें या अपने घर के गमलों में लगा दें .
नवरात्रि का यह नौ दिनों का पर्व केवल अनुष्ठान नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का संचार करने का समय है। सच्चे मन और श्रद्धा से की गई यह सरल पूजा विधि आपके जीवन में सुख, समृद्धि और शक्ति का संचार कर सकती है। पूरे नौ दिनों तक सात्विक विचार रखें, मां के भजनों का आनंद लें और परिवार के साथ मिलकर इस उत्सव को मनाएं

