दूसरी शादी की सफलता: D1 और D9 चार्ट से जानें पूरा राज़
क्या आप जानते हैं कि... एक फेमस स्टडी के हिसाब से, भारत में हर 100 में से लगभग 11 लोग अपनी पहली शादी के बाद अलग हो जाते हैं? और इनमें से 70% से ज़्यादा लोग दूसरी शादी के लिए तैयार भी रहते हैं। मगर... सवाल ये है कि… क्या वो दूसरी शादी सच में सुखदाई होगी?
क्या वो दर्द जो पहली शादी में हुआ, वो दोबारा नहीं होगा? क्या आप या आपके किसी अपने की कुंडली में 'दूसरी शादी' का योग है? और अगर है, तो क्या वो शादी सफल होगी?
आज के इस खास में हम वैदिक ज्योतिष की मदद से, D1 यानी राशि चार्ट और D9 यानी नवांश चार्ट के टेक्निकल एनालिसिस के ज़रिए, इन्हीं सवालों का जवाब देंगे। हम सिर्फ योग नहीं बताएंगे, बल्कि D1 और D9 के बीच के कॉम्प्लेक्स रिश्ते को समझेंगे, कि कैसे ये चार्ट्स आपकी दूसरी शादी की सफलता या असफलता की कहानी लिखते हैं।
तो बिना टाइम वेस्ट किए, चलिए शुरू करते हैं। नोटबुक या फोन में नोट-डाउन करना मत भूलना! और हाँ, वीडियो को लास्ट तक देखिए, क्योंकि आखिरी हिस्से में मैं आपको कुछ सरप्राइज़ रेमेडीज़ भी बताऊंगा।
भाग 1: पहली शादी का 'अंत' होना क्यों ज़रूरी है?
देखिए, पहली बात तो क्लियर करते हैं। दूसरी शादी तब तक नहीं हो सकती, जब तक पहली शादी का 'अंत' न हो। और ये 'अंत' सिर्फ डिवोर्स नहीं है; ये जुदाई (सेपरेशन), या पार्टनर का स्वर्गवास (डेथ) भी हो सकता है।
पहली शादी का टूटना हमारे D1 चार्ट के 7वें भाव और 7वें भावेश से देखा जाता है।
अगर 7वें भाव में शनि, राहु, केतु, या मंगल जैसे पाप ग्रह हैं, तो रिश्तों में तनाव रहता है।
अगर 7वें भावेश नीच (डिबिलिटेड) हों या 6ठे, 8वें, या 12वें भाव में हों, तो भी शादी में प्रॉब्लम आती है।
सबसे खतरनाक होता है राहु-केतु का 1-7 एक्सिस में होना। ये एक्सिस दोस्ती और दुश्मनी दोनों का माहौल बनाता है, लेकिन सुख के लिए अनस्टेबल होता है।
लेकिन ध्यान रहे: सिर्फ पहली शादी का टूटना काफी नहीं है। दूसरी शादी के लिए अलग से योग होने चाहिए।
भाग 2: दूसरी शादी के लिए कौन से भाव देखें?
अब आते हैं असली दूसरी शादी की भविष्यवाणी पर। पहली शादी के लिए 7वां भाव देखा जाता है, मगर दूसरी शादी के लिए अलग भाव एक्टिव हो जाते हैं।
वैदिक ज्योतिष में एक नियम है - भावत्-भावम्। इसका मतलब है कि किसी भी भाव का तीसरा भाव उस 'फेज़' का अगला कदम होता है। तो 7वें भाव (शादी) का तीसरा भाव है 9वां भाव।
तो दोस्तों, 9वें भाव को दूसरी शादी का प्राइमरी भाव माना गया है।
लेकिन तीन और भाव हैं जो खेल बदल देते हैं:
2रा भाव (धन और परिवार): ये 7वें भाव से 8वां भाव है। 8वां भाव 'अंत' (एंड) का भाव है। तो 2रा भाव दिखाता है कि पहली शादी का 'अंत' कैसे होगा, और क्या आप नया परिवार (दूसरी शादी) बनाना चाहते हैं।
9वां भाव (भाग्य और अगला कदम): जैसे मैंने बताया, ये दूसरी शादी का चेहरा है। अगर 9वें भावेश स्ट्रॉंग हैं, 7वें भावेश से रिलेशन बनाते हैं, तो दूसरी शादी की संभावना बढ़ जाती है।
11वां भाव (लाभ और इच्छा पूर्ति): ये दिखाता है कि आपकी इच्छा (डिज़ायर) दूसरी शादी की तरफ है या नहीं। अगर 11वां भाव स्ट्रॉंग है तो पार्टनर मिलने में आसानी होती है।
गुरुमंत्र: दूसरी शादी तभी सफल होगी जब 9वां भाव और 2रा भाव अपनी तरफ से फुल सपोर्ट देंगे। वो सपोर्ट आपको चार्ट्स में देखना होगा।
भाग 3: D9 (नवांश) चार्ट - दूसरी शादी का 'गेम चेंजर'
यहाँ तक हमने D1 चार्ट की बात की। लेकिन सबसे इंटरेस्टिंग पार्ट अभी आना बाकी है। दोस्तों, अगर D1 फिजिकल रियलिटी है, तो D9 (नवांश) चार्ट उस रियलिटी की 'रूह' (सोल) है।
दूसरी शादी का सच D9 चार्ट में छुपा होता है। पहली शादी के बाद, D9 चार्ट ज़्यादा एक्टिव हो जाता है। तो दूसरी शादी चेक करते वक़्त हम D9 को टॉप प्रायोरिटी देते हैं।
कैसे करें एनालिसिस?
D9 का 7वां भाव: देखिए D9 चार्ट में 7वें भाव में कौन सा ग्रह बैठा है। अगर शुक्र (वीनस) यहाँ स्ट्रॉंग है, तो दूसरी शादी में प्यार मिलेगा। लेकिन अगर यहाँ मंगल, शनि, राहु, या केतु हैं, तो दोबारा झगड़े और परेशानी हो सकती है।
D9 का 2रा भाव: D9 का 2रा भाव D1 के 9वें भाव की तरह काम करता है। अगर D9 के 2रे भावेश और 7वें भावेश एक्सचेंज (परिवर्तन) करते हैं, तो दूसरी शादी का योग पक्का माना जाता है!
ग्रह बल (स्ट्रेंथ): कोई ग्रह D1 में नीच (डिबिलिटेड) हो, मगर D9 में उच्च (एग्ज़ाल्टेड) हो, तो उसका बुरा प्रभाव खत्म हो जाता है। इसलिए, अगर आपके D1 में 7वां भाव वीक है, लेकिन D9 में 7वां भाव स्ट्रॉंग है, तो दूसरी शादी सक्सेसफुल होने के चांस काफी बढ़ जाते हैं।
भाग 4: सफल दूसरी शादी के कन्फर्म संकेत
चलो अब चेकलिस्ट बना लें। अगर आपकी कुंडली में ये संकेत हैं, तो दूसरी शादी सफलता की तरफ बढ़ रही है:
पहली शर्त (D1 और D9): D1 का 9वां भावेश और D1 का 7वां भावेश आपस में रिलेशन बना रहे हैं। और D9 में 7वां भाव स्ट्रॉंग है।
दूसरी शर्त (D9): D9 चार्ट के 2रे भावेश और 7वें भावेश एक्सचेंज या कंजंक्शन (युति) कर रहे हैं।
तीसरी शर्त (कारक): शुक्र (वीनस) और गुरु (जुपिटर) दोनों चार्ट्स में स्ट्रॉंग पोज़िशन में हैं। गुरु को जीव कारक और शुक्र को स्त्री कारक माना गया है। इन दोनों का आपस में रिश्ता दूसरी शादी को स्टेबिलिटी देता है।
चौथी शर्त (नवांश लग्न): D9 चार्ट के लग्नेश का 6ठे, 8वें, या 12वें भाव में न होना। अगर लग्नेश वीक है, तो इंसान मेंटली प्रिपेयर नहीं होता, चाहे योग हो।
मान लीजिए कुंभ लग्न (कुंभ राशि) है। D1 में 7वां भावेश (सूर्य) 9वें भाव (तुला) में है, तो दूसरी शादी का योग स्ट्रॉंग है। अब D9 में अगर लग्नेश शनि 11वें भाव में बैठा है और शुक्र 7वें भाव में, तो दूसरी शादी बहुत सुखदाई होगी।
भाग 5: आम गलतियाँ और दशा (समय)
अब सबसे इंपोर्टेंट हिस्सा: समय (दशा)।
सब योग हैं तो क्या? जब तक महादशा या अंतर्दशा सपोर्ट नहीं करेगी, तब तक शादी नहीं होगी।
दूसरी शादी आमतौर पर 9वें भावेश, 11वें भावेश, या 2रे भावेश की दशा में होती है।
अगर राहु की दशा चल रही है और राहु 7वें, 9वें, या 11वें भाव में है, तो अचानक दूसरी शादी हो सकती है। (क्योंकि राहु पैरानॉर्मल चीज़ों को तोड़ता है)।
गुरु दशा भी दूसरी शादी दे सकती है, लेकिन गुरु को 2रे, 7वें, या 11वें से कनेक्ट होना चाहिए।
गलती: बहुत लोग सिर्फ D1 देखते हैं। अगर D1 में 9वां भाव वीक है तो वो दूसरी शादी मना कर देते हैं। गलत! क्योंकि अगर D9 स्ट्रॉंग है, तो D9 के नियम डॉमिनेट करते हैं। तो हमेशा D1 और D9 को साथ देखें।
अगर आपकी कुंडली में दूसरी शादी के योग तो हैं, लेकिन कुछ ग्रह बाधा डाल रहे हैं, तो ये उपाय करें:
शुक्रवार को सफेद फूल माँ लक्ष्मी को चढ़ाएँ - इससे शुक्र मजबूत होता है।
गुरुवार को पीले रंग के वस्त्र धारण करें और गुरु मंत्र 'ॐ गुरुवे नमः' का जाप करें - इससे गुरु मजबूत होते हैं।
राहु-केतु की बाधा हो तो, हर शाम दीपक जलाएँ और 'ॐ राहवे नमः' व 'ॐ केतवे नमः' का 108 बार जाप करें।

