कब होगी आपकी शादी,क्यों हो रही है देर

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 कब होगी आपकी शा दी , क्यों हो रही है देर

शादी कब होगी और उसमें देरी क्यों हो रही है, यह जानने के लिए कुंडली में सप्तम भाव (7th house), उसके स्वामी (lord), ग्रहों की स्थिति और उनकी दशा-अंतर्दशा का गहराई से विश्लेषण करना जरूरी है। साथ ही, शुक्र, चंद्रमा, और गुरु (जिन्हें विवाह के प्रमुख कारक माना जाता है) की स्थिति को भी देखना आवश्यक है।

 

किसी व्यक्ति की शादी कब होगी यह कोई ऐसी स्थिति नहीं जिसे हम सही से नहीं जान सकते हैं हमें बस आवश्यकता होती है एक सही मार्गदर्शन की जिसे अधिकांश लोग ले नहीं पाते हैंशादी से जुड़े हर प्रश्न का उत्तर आपकी ही जन्मकुंडली छुपा होता हैइसी कारण से इसके लिए विवाह ज्योतिष की भूमिका को गहनता से जान लेना बहुत जरूरी है और साथ ही एक योग्य ज्योतिषी की मदद लेना भी बहुत आवश्यक होता है

7th house for marriage

शादी में देरी के क्या कारण हैं?

 

कई बार रिश्ते की खोज में लगातार मिलने वाली निराशा इतना परेशान कर देती है कि यह सब बहुत ही थका देने वाला और निराशाजनक भी बन जाता हैऐसे में मन में प्रश्न उठ सकता है कि आखिर शादी में देरी के क्या कारण हैं?, तो इस बात को आपकी कुंडली स्पष्ट रूप से बताती हैकुंडली में सातवां भाव विवाह का घर कहलाता हैजीवन साथी कैसा होगा इसकी जानकारी के लिए सप्तम भाव का सूक्ष्म विश्लेषण बहुत जरुरी होता हैसप्तम भाव का स्वामीसप्तम भाव के स्वामी पर अन्य ग्रहों का प्रभावसातवें भाव पर ग्रहों की दृष्टिसातवें भाव का स्वामी कुंडली में कहां बैठा हुआ है और वर्ग कुंडली में उसका क्या हाल हैयह बातें जान कर विवाह में देरी का कारण पता लगाया जाता है

शादी में देरी के ज्योतिषीय कारण

  1. सप्तम भाव और सप्तमेश की कमजोर स्थिति

    • यदि सप्तम भाव में पाप ग्रह (जैसे शनि, राहु, या केतु) बैठे हों या सप्तमेश कमजोर, वक्री या अस्त हो, तो शादी में देरी होती है।
    • उदाहरण: शनि यदि सप्तम भाव में हो, तो व्यक्ति का ध्यान करियर या जिम्मेदारियों पर अधिक होता है, जिससे शादी देर से होती है।
  2. शुक्र की स्थिति

    • शुक्र प्रेम और विवाह का प्रमुख ग्रह है। यदि शुक्र नीच का हो (जैसे कन्या राशि में), राहु/केतु के साथ हो, या 6वें, 8वें, या 12वें भाव में हो, तो शादी में रुकावट आती है।
  3. शनि का प्रभाव

    • शनि का सप्तम भाव या सप्तमेश पर प्रभाव शादी में देरी का संकेत देता है। शनि की ऊर्जा व्यक्ति को जिम्मेदारी और स्थिरता के लिए तैयार करती है, इसलिए यह शादी के लिए सही समय आने तक रुकावट डाल सकता है।
  4. गुरु का प्रभाव

    • गुरु (ज्यूपिटर) शुभ ग्रह है, लेकिन यदि यह कमजोर या प्रतिकूल भाव में हो, तो शादी की संभावनाएं बाधित हो सकती हैं।
  5. राहु और केतु का प्रभाव

    • सप्तम भाव में राहु या केतु की उपस्थिति विवाह के लिए भ्रम या देरी का कारण बन सकती है।
  6. दशा और गोचर

    • यदि विवाह कारक ग्रहों की दशा या अंतर्दशा नहीं चल रही है, तो शादी में देरी हो सकती है।
    • गुरु, शुक्र, या सप्तमेश की दशा विवाह के लिए अनुकूल होती है।

20 से 25 वर्ष की उम्र में शा दी 

बुध शीघ ही शादी करवा ता है। सातवें घर में बुध हो तो शा दी जल्दी हो ने के यो ग हो ते हैं। 

बी स वर्ष की उम्र में बुध पर को ई कि सी अन्य ग्रह का प्रभा व न हो । 

बुध यदि सातवें घर में हो तो सूर्य भी एक स्था न पी छे या आगे साथ सूर्य के हो ने की संभा वना रहती है | 

सूर्य साथ हो तो दो साल का वि लम्ब शा दी में अवश्य हो गा । इस त का यो ग बनता है। यदि सूर्य के अंश क्षी ण हों तो शा दी केवल 20 से21 वर्ष की उम्र में हो जा ती है। अभि प्रा य सातवें घर में हो तब 20 से25 की उम्र में शा दी का यो ग बनता है। 

25 से 27 की उम्र में शा दी 

यदि शुक्र, गुरु या चन्द्र आपकी कुंडली के सातवें घर में हैं तो 24- 25 की उम्र में शा दी हो ने की प्रबल संभा वना रहती है। गुरु सातवें घर में हो तो शा दी पच्ची स की उम्र में हो ती है। गुरु पर सूर्य या मंगल का प्रभा व हो तो शा दी में एक राहू या शनि का प्रभा व हो तो दो साल की देर या नी 27 साल की उम्र में शा दी हो ती है। 

शुक्र सातवें हो और शुक्र पर मंगल, सूर्य का प्रभा व हो तो शा दी में दो साल की देर अवश्यम्भा वी है। 

शनि का साल या नी छब्बीस साल की उम्र में और यदि राहू का प्रभा व शुक्र पर हो तो शा दी में दो सा ल का वि लम्ब हो ता चन्द्र सातवें घर में हो 

और चन्द्र पर मंगल, सूर्य में सेकि सी एक का प्रभा व हो तो शा दी 26 सा ल की उम्र में हो शनि का प्रभा व मंगल पर हो तो शा दी में ती न साल का वि लम्ब हो ता है। राहू का प्रभा व हो ने पर 27 वर्ष कबाद शा दी संपन्न हो ती है। कुंडली के सातवें घर में यदि सूर्य हो और उस पर कि सी अशुभ ग्रह का प्रभा व न हो तो 27 वर्ष की उम्र में शा शुभ ग्रह सूर्य के साथ हों तो वि वा ह में इतनी देर नहीं हो ती । 

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28 से 32 वर्षकी उम्र में शा दी 

मंगल, राहू केतु में सेको ई एक यदि सातवें घर में हो तो शा दी में का फी देर हो सकती है। जि तने अशुभ ग्रह सा में देर उतनी ही अधि क हो गी । मंगल सातवें घर में 27 वर्ष की उम्र सेपहले शा दी नहीं हो ने देता । राहू यहां हो वि वा ह नहीं हो सकता । बात पक्की हो ने के बा वजूद रि श्ते टूट जा ते हैं। केतु सातवें घर में हो ने पर गुप्त शत्रुओं अडचनें पैदा करता है। शनि सातवें हो तो जी वन साथी समझदा र और वि श्वा सपात्र हो ता है। सातवें घर में शनि यो गका रक हो ता है फि हो ती है। शनि सातवें हो तो अधि कतर मा मलों में शा दी ती स वर्ष की उम्र के बा द ही हो ती है। 

32 से 40 वर्षकी उम्र में शा दी 

शा दी में इतनी देर तब हो ती है जब एक सेअधि क अशुभ ग्रहों का प्रभा व सातवें घर पर हो । शनि , मंगल, शनि शनि सूर्य या सूर्य मंगल, सूर्य राहू एक साथ सातवें या आठवें घर में हों तो वि वा ह में बहुत अधि क देरी हो ने की हा लां कि ग्रहों की राशि और बला बल पर भी बहुत कुछ नि र्भर करता है परन्तु कुछ भी हो इन ग्रहों का सा तवें जल्दी हो ने की को ई संभा वना नहीं हो ती । शा दी में देर के लि ए जो ऊपर नि यम दि ए गए हैं उनमे अधि क सूक्ष्म गणना की आवश्यकता जरूर है परन्तु मो अत्यंत व्या वहा रि क सि द्ध हो ते हैं।

शादी कब होगी: संकेत

  1. गुरु का गोचर

    • जब गुरु सप्तम भाव, सप्तमेश, या चंद्रमा से संबंध बनाता है, तो शादी के योग बनते हैं।
    • गुरु का शुभ गोचर व्यक्ति को विवाह के लिए अनुकूल समय प्रदान करता है।
  2. शुक्र का प्रभाव

    • शुक्र की महादशा या अंतर्दशा के दौरान शादी के योग बनते हैं। यदि शुक्र मजबूत स्थिति में हो, तो यह समय और भी शुभ होता है।
  3. शनि का गोचर

    • शनि का सप्तम भाव, लग्न, या चंद्रमा पर शुभ दृष्टि होने पर शादी के संकेत मिलते हैं।
  4. दशा-अंतर्दशा का योगदान

    • सप्तमेश की दशा, लग्नेश की दशा, और चंद्रमा/शुक्र की अंतर्दशा के दौरान शादी होने की संभावना अधिक रहती है।

शादी में देरी के उपाय

  1. शुक्र के उपाय

    • शुक्रवार के दिन माता लक्ष्मी की पूजा करें।
    • चांदी का आभूषण पहनें और सफेद वस्त्र धारण करें।
    • "ॐ शुं शुक्राय नमः" मंत्र का 108 बार जाप करें।
  2. शनि के उपाय

    • शनिवार को शनिदेव की पूजा करें और शनि चालीसा का पाठ करें।
    • सरसों के तेल का दान करें।
  3. गुरु के उपाय

    • बृहस्पतिवार को केले के वृक्ष की पूजा करें।
    • "ॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं सः गुरवे नमः" का जाप करें।
  4. राहु और केतु के उपाय

    • राहु-केतु शांति के लिए हनुमान जी की आराधना करें।
    • "ॐ राहवे नमः" और "ॐ केतवे नमः" मंत्र का जाप करें।
  5. मंगलीक दोष के उपाय

    • यदि मंगलीक दोष है, तो मंगलवार को हनुमान मंदिर में पूजा करें।
    • मंगल ग्रह को शांत करने के लिए "ॐ कुं कुजाय नमः" का जाप करें।

निष्कर्ष

शादी में देरी के कारण आपकी कुंडली की विशिष्ट स्थिति पर निर्भर करते हैं। सही समाधान और उपाय करने के लिए कुंडली का विस्तृत अध्ययन जरूरी है। अगर आप अपनी कुंडली की जानकारी दें, तो मैं अधिक सटीक विश्लेषण कर सकता हूँ।

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